झारखण्ड राज्य में निःशुल्क और अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा के सर्वव्यापीकरण हेतु विद्यालयों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की छात्राओं के डा्ॅपआउट दर को कम करने, मध्य विद्यालयों में उनका नामांकन बढ़ाने तथा 14 वर्ष की उम्र तक उनकी विद्यालय में पढ़ाई सुनिश्चित करने हेतु उपयुक्त वातावरण स्थापित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वार " मुख्यमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना" की शुरुआत वित्तीय वर्ष 2014-2015 से की गई थी, जिसके तहत कक्षा 6 में अध्ययनरत ऐसी बालिकाओं का निकट के राष्ट्रीय /ग्रामीण बैंक में बचत खोलकर उसमें सरकार द्वारा रु. 2000/- की राशि सावाधि जमा (Fixed deposit) के रुप में हस्तांतरित की जाती है। जिससे सम्बंधित बालिका द्वारा कक्षा 8 की पढ़ाई पूरी कर कक्षा 9 में नामांकन के उपारांत निकाला जा सकता है। इस योजना के फलस्वरूप वर्ग 9 में नामांकन दर में भी वृद्धि देखी गई है, परंतु वर्ग 11 में छात्राओं का छीजन दर अधिक है।
उच्चतर माध्यमिक कक्षा में छीजन दर में कमी लाने, नामांकन एंव वहराव दर में वृद्धि लाने हेतु राज्य सरकार की " मुख्यमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना" की जगह " मुख्यमंत्री विद्यालक्ष्मी उच्च शिक्षा प्रोत्साहन योजना" को लागू किया गया है। जिसके तहत छात्राओं जब वर्ग उत्तीर्ण हो जाएगी तो उनके खाते में एकमुश्त राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
इस योजना के तहत वर्ग 9 की सभी बालिकाओं को झारखंड अधिविद्य परिषद द्वारा प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजन कर जिला संयंत्र एंव प्रखंड स्तर पर छात्रवृत्ति देने हेतु उनका चयन किया जाएगा। जिन जिलों में प्रखंडों की संख्या 7 तक तथा आबादी 12 लाख से कम है, उन जिलों से प्रति जिला 100 छात्रा, प्रखंडों की संख्या 8 से 12 तथा जनसंख्या 12 से 15 लाख के बीच रहने पर 200 छात्राओं तथा 13 या अधिक या अधिक प्रखंडों तथा 15 लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिलों से 300 छात्राओं का चयन किया जाएगा।
जिला स्तर पर चयनित छात्राओं को +2उत्तीण करने के पश्चात् उनके खाते में एकमुश्त राशि 10,000/- उपलब्ध कराई जाएगी। तथा राज्य के सभी प्रखंडों की सभी पंचायतों से 20-20छात्राओं का चयन किया जाएगा। जिन्हें +2 उत्र्तीण करने के पश्चात् एकमुश्त राशि 5000/- रुपए देने होगा। इसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत सीट आरक्षित रहेगी।
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